जौनपुर का इतिहास जमदग्निपुरम से जौनपुर आदि काल से आज तक in Hindi

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जौनपुर की गौरवशाली एवं वैभवशाली गाथा

जौनपुर का गौरव इतिहास: हिन्दू मुस्लिम सांप्रदायिक सदभाव, आध्यात्मिक, वैदिक, पौराणिक, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला, सुन्दर भवन, धार्मिक, मंदिर, मस्जिद, ऐतिहासिक दुर्ग, गौरवशाली सांस्कृतिक कला की प्राचीन धरोहर को आदि काल से अब तक अपने आप में समेटे हुए जौनपुर का विशेष इतिहास रहा है। जौनपुर के उत्पत्ति का इतिहास निम्न प्रकार से है। इतिहास में जौनपुर की आज तक की जानकारी।

जमदग्निपुरम=देवनगर/देवनगरी =यवनपुर=जौवनपुर=जौना=जौनपुर 

पौराणिक जौनपुर: पौराणिक कथाओं के अनुसार भृगुवंशी विष्णु अवतारी सप्तऋषि में से एक जमदग्नि के आश्रम एवं तपोस्थली होने के कारण इस पवित्र स्थान का नाम वर्तमान में जनपद जौनपुर पड़ा है। जौनपुर को भृगु वंशी ऋषी मुनियों की तपो भूमि का गौरव पौराणिक काल से ही प्राप्त हुआ है।

जमदग्निपुरम से जौनपुर: कथाओं के अनुसार प्रारम्भ में इसे जमदग्निपुरम के नाम से जाना जाता था लेकिन समय के साथ अवधी भाषा के कारण यह जौनपुर हो गया।

जौनपुर का 3000 साल पुराना इतिहास: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा जौनपुर किले के पास खुदाई में 3000 वर्ष पुराने मृदभांड और अस्थियों के अवशेष मिले हैं।

त्रेता युग में जौनपुर: लोक कथाओं के अनुसार जौनपुर शहर का इतिहास रामायण काल से भी जुड़ा है। ऐसा बताया जाता है कि त्रेता युग में जमदग्निपुरम (जौनपुर) के राजा किरारबीर का राम ने वध किया था।

यवनपुर से जौनपुर: लोक कथाओं के अनुसार जौनपुर के प्रारम्भ का नाम यवन पुर था जो की धीरे धीरे अवधी भाषा के प्रभाव के कारण यही यवन से जवन हुआ और बाद में जौन अथवा यौनपुर एवं वर्तमान में जौनपुर हो गया है। इतिहास गवाह है कि शर्की सुलतान अफ्रीका से भारत आये थे और अफ्रीकियों को यवन कहा जाता था। यवनों का शासन होने के कारण यह यवनपुर या जवनपुर से अन्तः जौनपुर हुआ है।

मुगल सल्तनत का जौनपुर: मुग़ल इतिहास के अनुसार सन 1359 में दिल्ली के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने अपने प्रिय चचेरे भाई मुहम्मद बिन तुगलक, उपनाम जौना खान के नाम पर इस जिले का नामकरण जौनपुर किया था।

जौना खान की मृत्यु 1351 ईस्वी: मोहम्मद बिन तुगलक जौनपुर के नामकरण के 8 वर्ष पहले ही में पाकिस्तान के थट्टा नामक स्थान पर लड़ाई करते हुए मारे गए थे। मुहम्मद बिन तुगलक के बचपन का नाम जौना खान था इसी कारण जौना खान की याद में इस शहर का नाम जौनपुर पड़ा।

मलिक सरवर: फिरोजशाह तुगलक ने सन 1388 में अपनी पुत्री के प्रेमी मलिक सरवर को जौनपुर का गवर्नर नियुक्त किया था।

स्वतंत्रता की घोषणा: सन 1393 ई. में मलिक सरवर ने आंतरिक कलह के कारण अपने आप को स्वतन्त्र घोषित कर लिया था।

शर्की वंश की स्थापना: मलिक सरवर ने अपने दत्तक पुत्र शर्की वंश की स्थापना सन 1393 ई. में जौनपुर में में ही की थी।

राजधानी जौनपुर: सन 1393 ई. में जौनपुर को राजधानी बनाने का शौभाग्य मलिक उसशर्क को प्राप्त हुआ जिसका साम्राज्य पश्चिम में इटावा से पूर्व में बंगाल और दक्षिण में विंध्याचल से लेकर उत्तर में नेपाल तक फैला था।

सूबेदार ख़्वाजा जहान: 1397 ई. में जौनपुर के सूबेदार ख़्वाजा जहान ने दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद तुग़लक़ की अधीनता को ठुकराकर अपनी स्वाधीनता की घोषणा कर दी थी।

मलिक उसशर्क का देहांत: सन 1398 ई. में शर्की वंश के संस्थापक मलिक उसशर्क की मृत्यु हो गयी।

अटाला मस्जिद: जौनपुर की ऐतिहासिक प्रसिद्ध मस्जिद अटाला की नींव फ़िरोज़शाह ने 1393 ई. में रखी थी जिसे 1408 में इब्राहिम शाह ने पूरा किया था

चार उंगली मस्जिद का निर्माण: 1417 ई. में जौनपुर प्राचीन विजयचंद्र मंदिर के स्थान पर खालिस मूख्ख्लीस मस्जिद (या चार उंगली मस्जिद) को सुल्तान इब्राहीम के सूबेदार अमीर खालिस ख़ाँ ने बनवाया था।

 जौनपुर की गौरवशाली सैन्य शक्ति: 1402 ईस्वी से 1440 ईस्वी तक मुबारक शाह के छोटे भाई शम्स उद दीन इब्राहिम ने जौनपुर सल्तनत की सैन्य शक्ति को सबसे अधिक ऊंचाई तक पहुँचाया था।

जामा मस्जिद जौनपुर: 1438 ई. में इब्राहीमशाह ने जामा मस्जिद बनवाना प्रारंभ किया था और इसे 1442 ई. में उनकी बेगम राजीबीवी ने पूरा करवाया था।

लोधी वंश का आधिपत्य: 1484 से 1525 ई. तक जौनपुर पर लोदी वंश का आधिपत्य रहा है।

इब्राहिम लोदी की मृत्यु: सन 1526 ईस्वी में पानीपत के युद्ध में बाबर ने अब्राहिम लोदी को परास्त करके मार डाला था।

हुमायू का शासन: जौनपुर पर वि‍जय पाने के लि‍ये बाबर ने अपने पुत्र हुमायू को भेजा जि‍सने जौनपुर के शासक को परास्‍त करके सल्तनत पर विजय प्राप्त कर ली।

हुमायूं की मृत्‍यु: 1556 ई0 में हुमायूं की मृत्‍यु हो गयी तो 18 वर्ष की अवस्‍था में उसका पुत्र जलालुद्दीन मोहम्‍मद अकबर गद्दी पर बैठा।

अली कुली खॉ की मृत्यु: 1567 ई0 में अली कुली खॉ के विद्रोह के कारण अकबर ने स्‍वयं चढ़ाई कि‍या और युद्ध में अली कुली खॉ मारा गया। मुग़ल बादशाह अकबर जौनपुर आया और यहॉ बहुत दि‍नो तक नि‍वास कि‍या। अकबर के ही शासनकाल में शाही पुल जौनपुर का र्नि‍माण हुआ। सरदार मुनीम खॉ को शासक बनाकर अकवर वापिस दिल्ली चला गया।

अकबर की सौगात: जौनपुर में गोमती नदी के ऐतिहासिक शाही पुल का निर्माण कार्य मुग़ल बादशाह अकबर ने 1564 ई. में प्रारंभ करवाया था। यह पुल 1569 ई. में बादशाह अकबर के सूबेदार मुनीम ख़ाँ के निरीक्षण में बनकर तैयार हुआ था।

धर्मांध सुल्तान सिकन्दर लोदी: जनपद जौनपुर के शर्की सुल्तानों के समय ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर तथा अन्य स्मारकों को लोदी वंश के मूर्ख तथा धर्मांध सुल्तान सिकन्दर लोदी ने 1495 ई. में बहुत नुकसान पहुँचाया।

अवध के नवाब शासन: 150 वर्ष (डेढ़ शताब्‍दी) तक मुगल सल्‍तनत का अंग रहने के बाद 1722 ई0 में जौनपुर ब्रिटिश द्वारा अवध के नवाब को सौपा गया।

 रेजीडेन्‍ट डेकना: जौनपुर 1775 ई0 से 1788 ई0 तक बनारस के अधीन रहा और बाद में रेजीडेन्‍ट डेकना के साथ रहा।

जौनपुर जमगढ़: ब्रिटिश शासनकाल 1818 ई0 में जौनपुर के अधीन आजमगढ़ को भी कर दि‍या गया।

जौनपुर एवं आजमगढ़ का विभाजन: ब्रिटिश द्वारा 1822 ई0 एवं 1830 ई0 में विभाजन कर अलग कर दि‍या गया।

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