बलरामपुर का इतिहास History of Balrampur in hindi

बलरामपुर की गौरव एवं वैभव गाथा

बलरामपुर इतिहास/ बलरामपुर का गौरव: भारतवर्ष अपनी विविधताओं के साथ अपना गौरवशाली इतिहास को समेटे हुये है, ऐतिहासिक दृष्टि से जनपद बलरामपुर का अतीत अत्यंत गौरवशाली और महिमामंडित रहा है। पुरातात्विक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक तथा औध्योगिक दृष्टि से बलरामपुर का अपना विशिष्ट स्थान है। हिन्दू मुस्लिम सांप्रदायिक सदभाव, आध्यात्मिक, वैदिक, पौराणिक, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला, सुन्दर भवन, धार्मिक, मंदिर, मस्जिद, ऐतिहासिक दुर्ग, गौरवशाली सांस्कृतिक कला की प्राचीन धरोहर को आदि काल से अब तक अपने आप में समेटे हुए बलरामपुर का विशेष इतिहास रहा है। बलरामपुर के उत्पत्ति का इतिहास निम्न प्रकार से है। इतिहास में बलरामपुर की आज तक की जानकारी।

बलरामपुर उत्तर प्रदेश का इतिहास: भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह राप्ती नदी के तट पर स्थित है और बलरामपुर जिले का जिला मुख्यालय है। जिले का क्षेत्रफल 336917 हेक्टेयर है। जिसमें कृषि सिंचित क्षेत्र 221432 हेक्टेयर है। वर्तमान बलरामपुर जिले में जो क्षेत्र है, वह प्राचीन समय में कोसल राज्य का एक हिस्सा था।

बलरामपुर का सम्पूर्ण इतिहास

श्रावस्ती से बलरामपुर का सम्बन्ध: बलरामपुर जिला पहले श्रावस्ती का अंग था, अब श्रावस्ती स्वयं बलरामपुर का हिस्सा है, इसलिए प्राचीन काल में जो श्रावस्ती का इतिहास ही वास्तव में बलरामपुर का इतिहास था।

प्राचीन युग का इतिहास बलरामपुर: प्राचीन काल में श्रावस्ती कोसल की राजधानी थी। प्राचीन श्रावस्ती के खंडहर, 400 एकड़ के क्षेत्र में फैले हुए हैं। यहाँ पर कई सारे बुद्ध से जुड़े हुए मंदिर है जिनको स्तूप कहा जाता है, यही पर एक पीपल का प्राचीन बृक्ष है जिसके नीचे बैठ कर बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था और इसी का नाम बोद्धि बृक्ष पड़ा। जीतनव मठ, देश के सबसे पुराने मठों में से एक गौतम बुद्ध  के पसंदीदा स्थलों में से एक कहा जाता है। इसमें 12 वीं शताब्दी के शिलालेख हैं। पास में ही पीपल का एक पवित्र वृक्ष भी है। यह कहा जाता है कि पेड़ बोधगया में मूल बोधि वृक्ष के एक पौधे से उगाया गया था। गौतम बुद्ध ने 21 साल पीपल के पेड़ के नीचे बिताए। अंगुलिमाल की कहानी तो हम सभी ने पढ़ी है, बलरामपुर के इतिहास में इसका महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि ये घटना श्रावस्ती के घने जंगलो में ही हुयी थी। शहर में धार्मिक महत्व का एक अन्य स्थल श्रावस्ती है। कहा जाता है कि जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर महावीर जैन ने इस स्थान को ‘प्रभावित’ किया था। इसमें श्वेतांबर मंदिर है।

मध्यकालीन युग का इतिहास: मध्यकालीन युग मे बलरामपुर जिला मुगल शासन के दौरान बहराइच का एक हिस्सा था। बाद में, यह ब्रिटिश सरकार द्वारा फरवरी, 1856 में अवध के शासक के नियंत्रण में आ गया। ब्रिटिश सरकार ने गोंडा को बहराइच से अलग कर दिया और बलरामपुर गोंडा का एक हिस्सा बन गया।

ब्रिटिश और स्वतंत्रता के बाद के कार्यकाल का इतिहास: ब्रिटिश शासन के दौरान गोंडा में अपने मुख्यालय के साथ इस क्षेत्र के प्रशासन के लिए एक कमीशन का गठन किया गया था। इस अवधि के दौरान बलरामपुर गोंडा जिले का जनपद था, जिसमें 3 तहसीलें, गोंडा सदर, तरबगंज और उटेरुला शामिल थे। 1 जुलाई 1953 को उत्तरौला की तहसील को दो तहसीलों, बलरामपुर और उटेरुला में विभाजित किया गया। 1987 में गोंडा सदर तहसील, तुलसीपुर, मनकापुर और कर्नलगंज से तीन नई तहसीलें बनाई गईं। बाद में, 1997 में गोंडा जिले को दो भागों में विभाजित किया गया और एक नए जिले के रूप में बलरामपुर का जन्म हुआ, जो तत्कालीन गोंडा जिले, बलरामपुर, उटुला और तुलसीपुर के उत्तरी भाग के तीन तहसीलों से मिलकर बना था।

बलरामपुर जनपद का नामकरण: बलरामपुर नगर का नाम यहाँ के एक पुराने ताल्लुकेदार राजा बलरामदास के नाम पर है। यह नगर अधिक पुराना नहीं है। महाराजा दिग्विजय सिंह के समय में बलरामपुर में काफ़ी उन्नति हुई।

बलरामपुर जिले की स्थापना: 25 मई, 1997 को जिला गोंडा और सिद्धार्थ नगर से पृथक कर के बलरामपुर जनपद का गठन किया गया।इसके पहले यह गोंडा जिले की उतरौला तहसील का भाग था और यह 1953 से लेकर 1987 तक रहा, इसके बाद बलरामपुर को एक स्वतंत्र तहसील की मान्यता मिली जो की 1997 तक रही इसके बाद बलराम पुर एक जिला बन गया, यही है बलरामपुर का संक्षिप्त इतिहास।

बलरामपुर जिले की स्थिति: बलरामपुर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के गोंडा ज़िले में, राप्ती नदी के 2 मील दक्षिण स्थित एक नगर है। यह पुरानी बलरामपुर रियासत की राजधानी भी रह चुका है। बलरामपुर जिले के पूर्व में सिद्धार्थनगर, पश्चिम में बलरामपुर, उत्तर में नेपाल, दक्षिण में गोंडा स्थित है। जिले के उत्तर में हिमालय की शिवालिक पर्वतमाला स्थित है। जिसे तराई क्षेत्र कहा जाता है।

देवी पाटनी मंदिर: तुलसीपुर में देवी पाटनी मंदिर में हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी दुर्गा के 51 “शक्तिपीठ” में शामिल होने का गौरव प्राप्त है।

बलरामपुर के के दर्शनीय स्थल:

सुहैलदेव वाइल्डलाइफ सैंक्चरी
कोइलाबास
देवी पाटन मन्दिर
बिजलीपुर मंदिर
बिजलेश्वरी देवी मंदिर
पवई वाटरफॉल
श्रावस्ती स्तूप

प्रसिद्ध स्थल
जयप्रभा ग्राम
तुलसीपुर

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