बलिया का इतिहास History of Ballia in Hindi

बलिया नामकरण: बलिया का नाम बलिया, राजा बलि के नाम से पड़ा है, पौराणिक कथाओं के अनुसार महा प्रतापी राजा बलि ने बलिया को अपनी वैभवशाली राजधानी बनाया था।

बलिया का इतिहास: वाल्मीकि, अत्री, वशिष्ठ, जमदग्नि, भृगु, दुर्वासा अनेक ऋषि मुनी, साधू संत, महात्माओं की तपोभूमि एवं आश्रम होने का गौरव वैदिक काल से ही बलिया इतिहास में समेटे हुए है। बलिया प्राचीन काल में कौशल साम्राज्य का अभिन्न अंग था। भारतवर्ष अपनी विविधताओं के साथ अपना गौरवशाली इतिहास को समेटे हुये है, ऐतिहासिक दृष्टि से जनपद बलिया का अतीत अत्यंत गौरवशाली और महिमामंडित रहा है। पुरातात्विक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक तथा औध्योगिक दृष्टि से बलिया का अपना विशिष्ट स्थान है। हिन्दू मुस्लिम सांप्रदायिक सदभाव, आध्यात्मिक, वैदिक, पौराणिक, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला, सुन्दर भवन, धार्मिक, मंदिर, मस्जिद, ऐतिहासिक दुर्ग, गौरवशाली सांस्कृतिक कला की प्राचीन धरोहर को आदि काल से अब तक अपने आप में समेटे हुए बलिया का विशेष इतिहास रहा है। बलिया के उत्पत्ति का इतिहास निम्न प्रकार से है। इतिहास में बलिया की आज तक की जानकारी।

बलिया का सम्पूर्ण इतिहास History of baliya in hindi

बागी बलिया का इतिहास (Ballia): बलिया जिसे भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में अपने उल्लेखनीय योगदान के वजह से बागी बलिया (Rebel Ballia) के नाम से भी जाना जाता है, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बलिया ज़िले में स्थित एक नगर है। ददरी-मेला यहाँ का प्रसिद्ध मेला है जो आश्विन मास में शहर की पूर्वी सीमा पर गंगा और सरयू नदियों के संगम पर स्थित एक मैदान पर मनाया जाता है। मऊ, आजमगढ़, देवरिया, गाजीपुर और वाराणसी के रूप में पास के जिलों के साथ नियमित संपर्क में रेल और सड़क के माध्यम से मौजूद है। यह बिहार की सीमा को छूता हुआ जिला है। इनके बाद मऊ जिला शुरू हो जाता है।

पौराणिक बलिया: बलिया ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण माना गया है। भारत के कई महान संत और साधु जैसे जमदग्नि, वाल्मीकि, भृगु, दुर्वासा आदि के आश्रम बलिया में थे। महर्षि भृगु के इस भू-भाग पर आकर आश्रम बनाने के बाद बलिया को भृगुक्षेत्र के नाम से जाना जाता था। इसके बाद उनके शिष्य दर्दर मुनि के नाम से दर्दर क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। बलिया प्राचीन समय में कोसल साम्राज्य का एक भाग था। यह भी कुछ समय के लिए बौद्ध प्रभाव में आया था। यह राजा बलि की धरती मानी जाती हैं। उन्ही के नाम पर इसका नाम बलिया पड़ा।

बौद्धकालीन इतिहास बलिया: बौद्धकालीन इतिहास में भी इस भू-भाग के बारे में अनेक महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। डॉ भीमराव अम्बेडकर ने अपनी पुस्तक ‘‘द बुद्धा एण्ड हिज धम्मा’’ में लिखा है कि- राजकुमार सिद्धार्थ ने महर्षि भृगु के आश्रम में कुछ समय रहकर यज्ञ कर्मकांड और साधना की विधियों को सीखा था।

गाजीपुर जनपद की तहसील बलिया: बलिया की स्थापना सन् 1798 ई0 में जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने गाजीपुर जिले को बनाया, तब बलिया को गाजीपुर जिले की एक तहसील बनाया गया था।

बलिया गाजीपुर का विभाजन: 1 नवम्बर 1879 को गाजीपुर से अलग करके बलिया का एक जिला के रूप में गठन हुआ। लगातार अशान्त रहने के कारण अग्रेजों ने इसे गाजीपुर से अलग कर दिया।

वीर लोरिक का इतिहास बलिया: वीर लोरिक का इतिहास इस जिला से जुड़ा हुआ है उनकी वीरता के बारे में ये कहा गया है कि उन्होंने अपनी तलवार से ही पत्थर को दो हिस्सों में अलग अलग कर दिया आज भी वह पत्थर मौजूद है बलिया को बागी बलिया के नाम से भी जाना जाता है।

बलिया नाम कैसे पड़ा: लोककथाओं के अनुसार बलिया का नाम बलिया राक्षस राज बलि के नाम पर पड़ा राजा बलि ने बलिया को अपनी राजधानी बनाया था। बलिया नाम के नामकरण के पीछे कई कहानियाँ हैं, यह माना जाता है कि बलिया शहर का नाम भारतीय इतिहास के प्रसिद्ध संत वाल्मीकि के नाम से लिया गया है। स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि वाल्मीकि, रामायण के लेखक इस शहर में रहते थे, इसलिए वहां उस जगह पर एक मंदिर बनाया गया था। हालांकि, मंदिर अब मौजूद नहीं है। दूसरी कहानी के मुताबिक, भूमि की मिट्टी की गुणवत्ता के कारण शहर को बलिया के रूप में नाम दिया गया है। बलिया में एक रेतीली मिट्टी होती है और इस प्रकार की मिट्टी को ‘बल्लुआ’ के रूप में जाना जाता है यह माना जाता है कि इस शहर को शुरू में ‘बालियन’ कहा जाता था और फिर ‘बलिया’ के रूप में बदल दिया गया था।

बलिया पुराना नाम व उपनाम: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपने महत्वपूर्ण योगदान के कारण बलिया को बागी बलिया के नाम से भी जाना जाता है।

बलिया जनपद की स्थिति: बलिया जिला भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ मंडल के अन्तर्गत आता है, बलिया जिला उत्तर प्रदेश का सबसे पूर्वी जिला है, जिसका मुख्यालय बलिया शहर है। उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ मण्डल का बलिया जनपद 25.33 तथा 26.11 उत्तरी अक्षांश एवं 83ः39 तथा 84ः39 पूर्वी देशान्तर पर स्थित है।बलिया जिले की उत्तरी और दक्षिणी सीमा क्रमश: सरयू और गंगा नदियों द्वारा बनाई जाती है। गंगा और घागरा, ये नदियां शहर को दूसरे पड़ोसी शहरों से अलग करती हैं जैसे गंगा बिहार से और घागरा देवरिया से बलिया को अलग करती है। बलिया के पूर्व में बिहार, पश्चिम में मऊ, उत्तर में देवरिया एवं बिहार, दक्षिण में गाजीपुर स्थित है। बलिया जिले में 06 तहसीलें, 17 विकासखंड और 2317 गाँव हैं। इसका कुल क्षेत्रफल 1981 वर्ग किमी है। बलिया की तहसीलें सदर, सिकंदरपुर, बैरिया, रसड़ा, बॉसडीह, बेल्थरा रोड है।

धर्मारण्य तालाब का इतिहास बलिया: बलिया जनपद के उत्तर में धर्मारण्य नामक एक ताल है, जिसके निकट अति प्राचीन काल में बौद्धों का एक ‘संघाराम’ स्थित था। इसका वर्णन चीनी यात्री फ़ाह्यान ने विशालशांति’ नाम से किया है। युवानच्वांग ने भी इस संघाराम का वर्णन करते हुए यहाँ अविद्वकर्ण साधुओं का निवास बताया है। धर्मारण्य पोखर के निकट भृगु का आश्रम बताया जाता है। इसकी स्थापना बौद्ध धर्म की अवनति के पश्चात प्राचीन संघाराम के स्थान पर की गई होगी।

1942 में बलिया का आंदोलन: 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान, इस क्षेत्र ने 14 दिनों की छोटी अवधि के लिए स्वतंत्रता हासिल की और नेता चित्तू पांडे के कुशल मार्गदर्शन में एक अलग स्वतंत्र प्रशासन का गठन किया। बलिया में शहीद स्मारक 1942 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शहीदों के सम्मान में बनाया गया था। चित्तू पांडेय के नेतृत्व में कुछ दिनों तक स्थानीय सरकार भी चली, लेकिन बाद में अंग्रेजों ने वापस अपनी सत्ता कायम कर ली।

भारत के स्वतंत्रता सेनानियों का जन्मस्थल: भारत के पहले स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे का जन्म बलिया में हुआ था। इसके अलावा भारत छोड़ो आंदोलन ’के जाने-माने नायक, चित्तू पांडे का जन्म भी बलिया में हुआ था। भारत छोडो आंदोलन” के राष्ट्रीय नायक और स्वतंत्रता सेनानी पं तारकेश्वर पांडे, राम पूजन सिंह और हरि राम भी बलिया के थे। भारत के पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय चंद्र शेखर बलिया जिले के मूल निवासी थे। स्वर्गीय राम नगीना सिंह फर्स्ट M.P.from बलिया 1952 थे। स्वर्गीय गौरी शंकर राय Ballia के कर्नाई गाँव के मूल निवासी थे, वे यूपी विधानसभा, विधान परिषद और संसद सदस्य भी थे। उन्होंने 1957 से 1962 तक विधानसभा में बलिया विधानसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया और 1967 से 1976 तक एमएलसी और गाज़ीपुर संसदीय क्षेत्र से 1977 से सांसद रहते हुए इसके विघटन तक। उन्होंने 1978 के सत्र में संयुक्त राष्ट्र महासभा को तत्कालीन विदेश मंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के साथ संबोधित किया। दोनों ने UNO के इतिहास में पहली बार Gen.Assembly को HINDI में संबोधित किया। प्रमुख नेताओ में स्व गौरी शंकर भइया , काशीनाथ मिश्र , मैनेजर सिंह, सांसद भरत सिंह रामगोविन्द चौधरी , अतुल कुमार सोनी आदि प्रसिद्ध है यहाँ पर वीर कुवर सिंह का ननिहाल भी हैं। भारत के पूर्व प्रधान मन्त्री चन्द्रशेखर भी इसी जिले के मूल निवासी थे। आपात काल के बाद हुई क्राति के जनक तथा महान स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण भी इसी जिले के मूल निवासी थे। समाजवादी चिंतक तथा देश में ‘छोटे लोहिया’ के नाम से विख्यात जनेश्वर मिश्र भी यही के निवासी थे।

बलिया में मुस्लिम आक्रमण एवं शासन : मुस्लिम आक्रमणकारियों में सबसे पहले सन् 1194 ई0 में कुतुबुद्दीन ऐबक बलिया जिले की सरहद में कुतुबगंज घाट पर आया। सन् 1202 ई0 में इख्तियार मुहम्मद ने घाघरा नदी के तट पर स्थित कठौड़ा और कुतुबगंज के समृद्ध नगर पर अधिकार कर लिया। यहाँ यह एक उल्लेख करना उचित होगा कि बलिया जिले का एक बहुत छोटा राज्य हल्दी जिसके यशस्वी तिलकधारी राजा श्री रामदेव जी हुए, वह मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा कभी जीते नहीं जा सके।

बलिया महाल: सन् 1302 ई0 में बादशाह बख्तियार खिलजी ने सबसे पहले वर्तमान बलिया जिले के नाम पर (वर्तमान बिहार) और (वर्तमान बंगाल) के कुछ भू-भाग को लेकर बलिया नाम से राजस्व वसूली की इकाई ‘बलिया महाल’ बनाया था।

सिकन्दर लोदी बलिया: सन् 1493 ई0 में सिकन्दर लोदी बलिया के घाघरा नदी के तट पर स्थित कठौड़ा आया था।

बलिया में बाबर और महमूद लोदी का युद्ध: 05 मई 1529 ई0 को बाबर और महमूद लोदी के बीच मध्ययुगीन इतिहास की पहली जल और थल युद्ध का साक्षी बलिया बना। जिसमें बाबर विजयी हुआ था। मुगल बादशाह औरंगजेब की मौत के बाद बलिया में राजपूत जमींदार शासन करने लगे। किन्तु सन् 1719 ई0 में जब मुहम्मद शाह दिल्ली की गद्दी पर बैठा, तो उसने इन जमींदारों से लगान वसूल कराने लगा।

बलिया में ईस्ट इंडिया कंपनी अधिकार: 29 दिसम्बर 1764 ई0 को इस जिले का भू भाग भी ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार के अधीन हो गया था।

बलिया का हिंदी साहित्य में योगदान: बलिया ने हिंदी साहित्य में बहुत योगदान दिया है क्योंकि हजारी प्रसाद द्विवेदी, अमरकांत, परशुराम चतुर्वेदी जैसे प्रमुख विद्वान इसी जिले से हैं।

बलिया के दर्शनीय स्थल:

बोटैनिकल गार्डन Botanical Garden Ballia
दादरी मेला Dadri Fair Ballia
भृंगु मंदिर Bhring Temple Ballia
बलिया बालेश्वर मंदिर Baleshwar Temple Ballia
सुरहा ताल Surha taal Ballia
शहीद स्मारक Saheed Statue Ballia
श्री चैन राम बाबा मंदिर Shri Chenram Baba Temple Ballia
श्री खपड़िया बाबा मंदिर Shri Khapariya Baba Temple Ballia
जंगली बाबा मंदिर Jangli Baba Temple Ballia
मंगला भवानी मंदिर Mangla Bhawani Temple Baliya
कामेश्वर धाम कारो Kameshwar daam karo Baliya

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