अम्बेडकर नगर का सम्पूर्ण इतिहास History of Ambedkar Nagar in hindi

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अम्बेडकर नगर की गौरवशाली एवं वैभवशाली गाथा

अम्बेडकर नगर का गौरव इतिहास: अम्बेडकर नगर का इतिहास ऐतिहासिक दृष्टि से जनपद अम्बेडकर नगर का अतीत अत्यंत गौरवशाली और महिमामंडित रहा है। हिन्दू मुस्लिम सांप्रदायिक सदभाव, आध्यात्मिक, वैदिक, पौराणिक, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला, सुन्दर भवन, धार्मिक, मंदिर, मस्जिद, ऐतिहासिक दुर्ग, गौरवशाली सांस्कृतिक कला की प्राचीन धरोहर को आदि काल से अब तक अपने आप में समेटे हुए अम्बेडकर नगर का विशेष इतिहास रहा है। परिवर्तन के शाश्वत नियम के अनेक झंझावातों के बावजूद अम्बेडकर नगर अस्तित्व अक्षुण्य् रहा है। अम्बेडकर नगर के उत्पत्ति का इतिहास निम्न प्रकार से है। इतिहास में अम्बेडकर नगर की आज तक की जानकारी।

अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश: वर्तमान समय में यह अम्बेडकर नगर ज़िले का जिला मुख्यालय है। पावन सरयू नदी इस जनपद का मुख्य आकर्षण है। वर्तमान अम्बेडकरनगर जिला फैजाबाद जनपद का हिस्सा हुआ करता था।

पौराणिक अम्बेडकर नगर: पौराणिक कथाओं के अनुसार अम्बेडकर नगर जिला, माता और पिता की सेवा करने वाले भक्त पुत्र श्रवण कुमार से जुड़ा हुआ है। जो क्षेत्र तमसा और बिसुई नदी के संगम पर स्थित है। जहां अयोध्या नरेश महाराजा दशरथ ने इसी संगम तट पर श्रवण कुमार को मार दिया था, जब श्रवण अपने अंधे माता पिता के लिए नदी से जल लेने गए थे। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा इस स्थल का चयन पर्यटन के लिए किया गया है और हर वर्ष यहां मेले का आयोजन भी होता है।

अम्बेडकर नगर त्रेता युग: अम्बेडकर नगर की भूमि प्रभु श्री राम की लीला स्थली होने के कारण तीर्थ भूमि है।

बाबा गोविन्द साहब की तपोस्थली: बाबा गोविन्द साहब की तपोस्थली जो अम्बेडकर नगर जिले के पूर्वी छोर आजमगढ़ जिले की सीमा पर आलापुर तहसील क्षेत्र में स्थित है। इस स्थल पर मान्यता है कि बाबा गोविन्द साहब (जो एक ऐसे संत थे, जो गरीबों की सेवा के लिए जाने जाते थे) का समाधि स्थल है और हर साल दिसंबर और जनवरी के महीने में यहां एक विशाल मेला लगता है और लोग यहां अपनी मन्नतों के लिए खिचड़ी चढ़ाते हैं।

सूफी संत मखदूम अशरफ सिमनानी: अम्बेडकर नगर जनपद में अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्राप्त सूफी संत मखदूम अशरफ सिमनानी की दरगाह किछौछा में स्थित है। इस सूफी संत के बारे में कहा जाता है कि ईरान के सिमनान प्रान्त के ये बादशाह थे। लेकिन अचानक इनका मोह शासन से भंग हो गया और ये अपना शासन छोड़कर लोगों की भलाई के लिये निकल पड़े। किछौछा में आकर इस सूफी संत ने लोगों की सेवा की और इसी वजह से यहां स्थित उनकी मजार पर बिना किसी भेदभाव के सभी धर्मों के लोग लाखों की संख्या में आते हैं।

अम्बेडकर नगर की स्थापना: अम्बेडकरनगर ज़िला उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमन्त्री मायावती के द्वारा 29 सितंबर 1995 को बनाया गया था। इसका नाम भारतीय संविधान निर्मात्री सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा गया है, जो वंचित वर्गों, महिलाओं और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए काम किया था। फैजाबाद से विभक्त होकर अस्तित्व में आये अम्बेडकरनगर जनपद का मुख्यालय अकबरपुर है।

अम्बेडकर नगर का पुराना नाम व उपनाम: अम्बेडकर नगर का पुराना नाम व उपनाम शिमाई कारिरत नगर है।

अम्बेडकरनगर जनपद की स्थिति: अम्बेडकर नगर समुद्र तल से 133 मीटर (436 फिट) की ऊँचाई पर तथा 26.431 अंश उत्तरी अक्षांश और 82.540 अंश पूर्वी देशांतर पर स्थित हैं। अम्बेडकर नगर पूर्व में आजमगढ़ एवं गोरखपुर, पश्चिम में फैजाबाद, उत्तर में बस्ती एवं संत कबीर नगर तथा दक्षिण में सुल्तानपुर स्थित है। पांच तहसीलों और दस ब्लाकों में विभक्त अम्बेडकरनगर जनपद का कुल क्षेत्रफल 2350 वर्ग किमी0 है। जिले में कुल 1750 राजस्व गांव है। जिन्हें मिलाकर कुल 930 ग्राम पंचायतें तीन नगर पालिका व दो नगर पंचायतें गठित हैं।

अकबरपुर शहर, अम्बेडकर नगर: अकबरपुर शहर टोंस (तमसा) नदी के किनारे पर स्थित है, जो शहर को दो भागों में अकबरपुर और शाहजदपुर में विभाजित करता है, जिसके बाद शहर का मुख्य वाणिज्यिक केंद्र है।

मुगल का शासनकाल: मुग़ल काल में इस क्षेत्र को पहचान मिलनी शुरू हुई जो अग्रेजी हुकूमत में आगे बढ़ी। मुस्लिम शासकों ने इमामबाड़ों, मस्जिदों, ईदगाहों, और धर्मशालाओं का निर्माण कराया जब कि अंग्रेजों ने स्कूल, अस्पताल, पुल, तहसील, ब्लाक, रेलवे स्टेशन बनवायें।

सम्राट अकबर का अम्बेडकरनगर में आगमन: सन् 1566 ई0 में जब सम्राट अकबर अम्बेडकरनगर में आये, तब सम्राट अकबर यहां जिस स्थान पर रूके उसे आज तहसील तिराहे के नाम से जाना जाता हैं। उस समय बादशाह अकबर ने तहसील तिराहे के बगल पूजा के लिए एक मस्जिद का निर्माण कराया। जिसे आज किले वाली मस्जिद के नाम से जाना जाता हैं। इसी दौरान उन्होने एक बस्ती भी बसायी जिसे अकबरपुर नाम दिया गया जो आज जिला मुख्यालय के रूप में जाना जाता हैं। लोक कथाओं के अनुसार यहां से आगे बढ़ने के लिए तमसा नदी को पार करने का कोई साधन नही था। जिसके लिए सम्राट अकबर ने एक लकड़ी का पुल बनवाया था जिसे काफी दिन तक शाही पुल के नाम से जाना जाता रहा। यही पुल आज बदले स्वरूप में अकबरपुर और शहजादपुर को जोड़ता हैं। इतिहासकार बताते हैं कि शाही पुल निर्माण के बाद सम्राट अकबरपुर के निर्देश पर शहजादपुर और उनके उपनाम से जलालपुर बस्तियां आबाद हुई जिन्हे आगे चलकर मौजे की मान्यता मिली। आज वही बस्तियां अच्छे कस्बे के रूप में विख्यात हैं।

यवनो के आक्रमण: अम्बेडकर नगर के भव्य प्राचीन मन्दिर यवनो के आक्रमण से ध्वस्त हो गए। यह एक नगर पालिका परिषद है।

अम्बेडकरनगर जलालपुर कस्बे में राजभरों का राज: अम्बेडकरनगर जनपद के अहम हिस्से के रूप में जाने गये जलालपुर कस्बे के आसपास सन् 1300 के आसपास तक राजभरों का राज था। भुजगी और सुरहुरपुर इनके दो रियासते थी। जिसमें सुरहुरपुर रियासत को सैय्यद सालार मसऊद गाजी उर्फ गाजी मियां ने जीत लिया था और भुजगी रियासत राजपूतों के कब्जे में चली गयी। इसी दौरान आये ईरानी सरदार नकी के नाम पर नकीपुर बसा जो आज नागपुर के नाम से विख्यात है।

फैजाबाद जनपद का हिस्सा अम्बेडकरनगर: जनपद विभाजन से पूर्व यह क्षेत्र फैजाबाद जनपद का हिस्सा हुआ करता था। उस समय यह क्षेत्र अकबरपुर और टाण्डा दो तहसीलों में विभक्त था। इसी बीच लोगों की मांग को देखते हुए 22 जून 1989 को तत्कालीन मुख्यमंत्री व तत्कालीन राजस्व मंत्री ने अकबरपुर के कुछ हिस्से को विभक्त कर जलालपुर तहसील का सृजन किया। आगे चलकर जिला विभाजन के बाद जनमांग को देखते हुए 7 दिसम्बर 1995 को तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने टाण्डा तहसील गठन का फैसला लिया। जिसे तत्कालीन मण्डलायुक्त ने 1 जनवरी 1996 को मूर्त रूप दिया। उसी के साथ आलाुर तहसील अस्तित्व में आ गयी। इसी बीच 31 अक्टूबर 2007 को अकबरपुर तहसील के कुछ हिस्सों को लेकर भीटी तहसील का सृजन हुआ। इस प्रकार जिले में कुल पांच तहसील हो गयी। यह नही 930 ग्राम पंचायतों और 1750 राजस्व गांवो में फैले अम्बेडकरनगर जनपद को पहले 9 विकास खण्डों में विभक्त किया गया हैं। जिसमें अकबरपुर, टाण्डा, बसखारी, रामनगर, जहांगीरगंज, भियांव, जलालपुर, कटेहरी और भीटी शामिल हैं।ऐतिहासिक दृष्टि कोण से यदि नजर डाले तो मिलता है कि जिस अकबरपुर शहर को अम्बेडकरनगर जिले का मुख्यालय बनाया गया हैं।

अम्बेडकरनगर का स्वर्णिम काल: सन् 1947 में आजादी के बाद स्थानीय नागरिकों ने आजादी की साँस ली। सन् 1952 में प्रथम चुनाव के बाद आये जमीदारी उन्मूलन विधेयक ने तमाम गरीबों, मजदूरों व कामगारों को भूमिहीन से भूमिदार बनाया। यद्यपि आजादी मिलने के बाद इस क्षेत्र के विकास को लेकर प्रयास होते रहे परन्तु बीसवीं सदी के अंतिम दिनों से लेकर इक्कीसवी सदी का प्रारम्भ काल अम्बेडकरनगर का स्वर्णिम काल कहा जा सकता है। क्योकि तत्कालीन राज्य सरकार की मुख्यमंत्री ने इसे अपनी कर्मभूमि बनाया परिणाम रूवरूप उनकी विकास योजनाएं अम्बेडकरनगर के लिए वरदान साबित हुई। परिणाम आज सबके सामने हैं। आज अम्बेडकर नगर राष्ट्रीय क्षितिज पर तेजस्वी है।

स्वतंत्रता सेनानी का जन्मस्थान अम्बेडकर नगर: अकबरपुर स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राम मनोहर लोहिया (1910-1967) और डॉ गणेश कृष्ण जेटली, एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और एक समाजवादी राजनीतिक नेता का जन्मस्थान है।

अम्बेडकर नगर पावर प्लांट: अम्बेडकर नगर जनपद में स्थापित बिजली के पावर प्लांट के कारण इस जिले की पहचान पूरे देश में बनी है। जिले की टांडा तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी के तट पर स्थापित इस पावर प्लांट का निर्माण उत्तर प्रदेश सरकार ने किया था, जिसे बाद में देश की नव रत्न कंपनियों में से एक एनटीपीसी ने ले लिया और अब इसकी क्षमता के विस्तार का काम कर रही है।

अम्बेडकर नगर के कारखाने: यहाँ टांडा, अकबरपुर औऱ जलालपुर कई छोटे लुम के कारखाने हैं, जिस में टेरीकाट औऱ सूती कपड़े ,लुन्गी(ताहबन) गमछा आदि तैयार होते हैं।

अम्बेडकर नगर के दर्शनीय स्थल: अम्बेडकर नगर जिले में कई ऐतिहासिक स्थान हैं जैसे श्रवण क्षेत्र, दरगाह शरीफ, किचौचा में, गोविंद साहब और शिव बाबा आदि। अम्बेडकर नगर के दर्शनीय स्थल, अम्बेडकर नगर के पर्यटन स्थल, अम्बेडकर नगर में घूमने लायक जगह में विभिन्न बाजार और खुबसूरत स्थान भी हैं, जिन्हें देखे बिना अम्बेडकर नगर की यात्रा, अम्बेडकर नगर भ्रमण, अम्बेडकर नगर की सैर अधूरी रहती है। हम अपने इस लेख मे अम्बेडकर नगर के इन्हीं खूबसूरत दर्शनीय स्थल के बारे मे बताएंगे।

अम्बेडकर नगर में देखने योग्य जगह क्या है ?

शिव बाबा मंन्दिर अम्बेडकर नगर
गोविंद साहब अम्बेडकर नगर
किछौछा शरीफ अम्बेडकर नगर
एन.टी.पी.सी. टाण्डा अम्बेडकर नगर
श्रवण क्षेत्र अम्बेडकर नगर
ऐतिहासिक घंटाघर अम्बेडकर नगर
भीटी व लोरपुर रियासत अम्बेडकर नगर
अठखंभा अम्बेडकर नगर
रामपुर सकरवारी अम्बेडकर नगर
राम जानकी मंदिर धवरूआ तिराहा(प्राचीन पोखरा) अम्बेडकर नगर
लोरपुर किले अम्बेडकर नगर
हनुमान मंदिर अम्बेडकर नगर

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