अमरोहा का सम्पूर्ण इतिहास History of Amroha in hindi

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अमरोहा की गौरवशाली एवं वैभवशाली गाथा

अमरोहा का गौरव इतिहास: अमरोहा का इतिहास ऐतिहासिक दृष्टि से जनपद अमरोहा का अतीत अत्यंत गौरवशाली और महिमामंडित रहा है। हिन्दू मुस्लिम सांप्रदायिक सदभाव, आध्यात्मिक, वैदिक, पौराणिक, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला, सुन्दर भवन, धार्मिक, मंदिर, मस्जिद, ऐतिहासिक दुर्ग, गौरवशाली सांस्कृतिक कला की प्राचीन धरोहर को आदि काल से अब तक अपने आप में समेटे हुए अमरोहा का विशेष इतिहास रहा है। परिवर्तन के शाश्वत नियम के अनेक झंझावातों के बावजूद अमरोहा अस्तित्व अक्षुण्य् रहा है। अमरोहा के उत्पत्ति का इतिहास निम्न प्रकार से है। इतिहास में अमरोहा की आज तक की जानकारी।

अमरोहा उत्तर प्रदेश: अमरोहा भारत के उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद उप-मंडल के चार प्रांतों में से एक है। यह शहर जिला अमरोहा का मुख्यालय है और उत्तर प्रदेश के 72 जिलों में से एक है। अमरोहा जिले का पहले नाम ज्योतिबा फुले नगर था और ये नाम अभी बदल कर फिर से अमरोहा किया गया है। अमरोहा जिला उत्तर प्रदेश के उत्तरी भाग में है।

3000 वर्ष पूर्व का अमरोहा: अमरोहा नगर की स्थापना आज से लगभग 3,000 वर्ष पूर्व हस्तिनापुर के राजा अमरजिद अमरोहा ने की थी और संभवत उन्हीं के नाम पर इस नगर का नाम भी अमरोहा पड़ा। कुछ विद्वानों के विचार से पृथ्वीराज की भगिनी अंबीरानी के नाम और तब से मुसलमानों के इतिहास में इसका उल्लेख बराबर मिलता है। अलाउद्दीन 1295-1315 ई. के समय में चंगेज़ खाँ ने अमरोहा पर आक्रमण किया था।

वर्तमान अमरोहा जिले की स्थापना: ज़िला अमरोहा (पूर्ववर्ती ज्योतिबा फुलेनगर) दिनांक 15 अप्रैल 1997 को राज्य सरकार द्वारा स्थापित किया गया जिसका मुख्यालय अमरोहा नगर को बनाया गया नवनिर्मित जनपद में तीन तहसील शामिल की गयीं अमरोहा, धनौरा, एवं हसनपुर। वर्तमान में नवीन तहसील नौगावां सादात को मिला कर 4 तहसील जनपद में शामिल हैं।

अमरोहा नाम कैसे पड़ा: ऐसा माना जाता है कि जनरल शारफुद्दीन यहां आए थे और स्थानीय लोगों ने आम और मछलियों को प्रस्तुत किया था। इस प्रकार उन्होंने शहर का नाम आम-रोहू रख दिया जिसे अब अमरोहा कहा जाता है।

अमरोहा जनपद की स्थिति: अमरोहा उत्तरी भारत के पश्चिमोत्तर उत्तर प्रदेश राज्य में मुरादाबाद जिले के पश्चिम – पश्चिमोत्तर में सोत नदी के किनारे स्थित एक तहसील तथा पुराना नगर है। अमरोहा तहसील का मैदान समतल है। इसमें से तीन छोटी छोटी नदियाँ बहती हैं। पूर्वी सीमा पर रामगंगा है। अमरोहा नगर मुरादाबाद के उत्तर पश्चिम में लगभग 23 मील की दूरी पर और बान नदी के दक्षिण पश्चिम में लगभग चार मील पर है। यहाँ नगरपालिका है। तथा रेल मार्ग से यह मुरादाबाद व दिल्ली से जुड़ा हुआ है। भारत विभाजन के बाद यहाँ से काफी मुसलमान पाकिस्तान चले गए। नगर का वर्तमान क्षेत्रफल लगभग 397 एकड़ है। अमरोहा के अक्षांस और देशांतर क्रमशः 28 डिग्री 54 मिनट उत्तर से 78 डिग्री 28 मिनट पूर्व तक है। अमरोहा जनपद के पूर्व में मुरादाबाद, पश्चिम में गाजियाबाद, मेरठ और बुलंदशहर, उत्तर में बिजनौर, दक्षिण में बदायूँ स्थित है।

राजा अमरजोध का शासन: 474 ई. पूर्व अमरोहा क्षेत्र में वंशी साम्राज्य के राजा अमरजोध का शासन था।

तारीखे-अमरोहा पुस्तक: तारीखे-अमरोहा नामक ऐतिहासिक पुस्तक में यह उल्लखित है कि अमरोहा में 676 से 1148 ईस्वी तक राजपूत वंश का शासन था।

बहराम शाह (1240 – 42): बहराम शाह (1240 – 42) ने मलिक जलालुद्दीन को अमरोहा के हकीम के पद पर नियुक्त किया। प्राचीन समय में पांचाल प्रदेश के शासकों को, हस्तिनापुर के कुरु राजाओं द्वारा हटा दिया गया।

अमरोहा जनपद में गुप्त वंश का शासन: कुषाण एवं नंद साम्राज्य के पतन के बाद इस क्षेत्र पर मौर्य वंश का भी शासन रहा तत्पश्चात समुद्रगुप्त का शासन स्थापित हुआ। लगभग दो शताब्दियों तक गुप्त वंश का शासन इस क्षेत्र पर रहा। गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद कन्नौज के राजा मुखारी का नियंत्रण इस क्षेत्र पर हो गया।

अमरोहा जनपद में कन्नौज नरेश हर्ष का शासन काल: गुप्त वंश के शासन के पश्चात् 606 से 647 ईस्वी तक यह कन्नौज नरेश हर्ष के शासन क्षेत्र में रहा। हर्ष की मृत्यु के पश्चात जनपद का उत्तरी क्षेत्र तोमर वंश के साम्राज्य क्षेत्र में रहा।

अमरोहा का युद्ध: इतिहास के अनुसार अमरोहा का युद्ध 20 दिसम्बर 1305 में हुआ था, अमरोहा की लड़ाई अलाउद्दीन खिलजी और मोंगोलो के बीच हुयी थी।

अमरोहा जनपद में मुगलो का शासनकाल: पृथ्वी राज चौहान की शहाब-उद-दीन मुहम्मद गोरी के हाथों हार के बाद मुस्लिम शासन बढ़ना प्रारम्भ हुआ एवं अन्ततः राजपूत वंश के कठेरिया, बड़गूजर, गौड़, तोमर एवं अन्य क्षेत्रीय वंश सयुंक्त रूप से विदेशी मुस्लिम आक्रमणकारियों के ख़िलाफ़ खड़े हुए। इनके प्रयासों के बावजूद जनपद के कुछ क्षेत्र में मुस्लिम चौकियां स्थापित हो गयीं। हालांकि मुस्लिमों को पूर्ण सफ़लता तभी मिली, जब 1526 ईस्वी में बाबर दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। हुमायूँ के कार्यकाल में कुछ समय के लिए क्षेत्र अफगानों, जिसका नेता शेरशाह सूरी था, के प्रभुत्व में आ गया, लेकिन अकबर के कार्यकाल में पुनः मुग़ल शासन के अधीन हो गया। रूहेलाओं ने भी समय-समय पर अपना प्रभुत्व इस क्षेत्र पर बनाये रखा। साथ-साथ मराठाओं ने भी इस क्षेत्र पर समय-समय पर आक्रमण किये परन्तु वह विफ़ल रहे। बाद में यह क्षेत्र अवध के नियंत्रण में आ गया।

ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में अमरोहा: अमरोहा का वर्तमान क्षेत्र बरेली जनपद में स्थित उत्तरी पांचाल देश, जिसकी राजधानी अहिछत्र थी, के राज्य में शामिल था। कहा जाता है कि मुग़ल शासक शाहजहाँ के शासन के समय में संभल के गवर्नर रुस्तम खां ने एक किले का निर्माण यहाँ कराया था तथा व्यापारियों तथा खेतिहरों को इसके आसपास बसाया था ।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी: 1801 में अमरोहा जनपद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधीन हो गया।

अमरोहा जनपद का ऐतिहासिक दृष्टि से महत्व: अमरोहा का प्राचीन नाम अंबिकानगर कहा जाता है। अमरोहा पहले बड़ा नगर था। ऐतिहासिक अवशेषों की दृष्टि से अमरोहा मुरादाबाद जिले में सर्वप्रथम है। यहाँ 100 से भी अधिक मस्जिदें तथा लगभग 40 मंदिर हैं। पुराने जमाने के हिंदू राजाओं के बनवाए हुए कुएँ, तालाब, सेतु, किले आदि के अवशेष अभी भी दिखाई पड़ते हैं। नगर में यत्रतत्र मुसलमानी जमाने की बड़ी-बड़ी इमारतें ध्वंसोन्मुख अवस्था में खड़ी दिखाई देती हैं। अमरोहा मुसलमानों का तीर्थस्थान है। आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के अलावा शेख सद्दू की मसजिद यहाँ की सबसे पुरानी इमारत है जो कभी हिंदुओं का मंदिर थी। आज की मस्जिद की दीवारों पर कहीं-कहीं हिंदू कला दिखाई देती है। हिंदू से मुस्लिम कला में परिवर्तन 1286 से 1288 के बीच कैकोबाद की राजसत्ता में हुआ। शेख सद्दू की अलौकिक शक्ति के बारे में कई किंवदंतियाँ हैं, जिनपर विश्वास रखने वाले लोग रोगों से छुटकारा पाने के लिए यहाँ आते हैं। वर्तमान समय की बनी शाह वालियत की दरगाह भी मशहूर है जो उस फकीर की कब्र पर बनी है। इस दरगाह पर हिंदू मुसलमान दोनों धर्मावलंबियों की श्रद्धा है और प्रति वर्ष लाखों यात्री इसका दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। इसके अतिरिक्त और कई फकीरों की दरगाहें भी यहाँ हैं।

अमरोहा के पर्यटन स्थल: अमरोहा शहर उत्तर प्रदेश राज्य के सोत नदी के निकट बसा है। अमरोहा शहर अपने आमों के लिए भी खासा प्रसिद्ध है। इस नगर में मिट्टी के बर्तन, बुनाई, चीनी मुख्य उद्योग हैं। इसके अलावा यहां पर कालीन, लकड़ी के हस्तशिल्प, ढोलक भी बनाए जाते हैं। अमरोहा नगर को प्राचीन काल में अंबिकानगर से जाना जाता था यहां पर घूमने के लिए मुस्लिम पीर शेख सद्दू की दरगाह, श्री वासुदेव तीर्थ, तुलसी पार्क, आदि स्थल हैं।

अमरोहा में देखने योग्य जगह क्या है ?

दरगाह शाह विलायत
इमामबारगाह वजीर-उन-निसा
वासुदेव मंदिर
तुलसी गार्डन
अमरोहा किले की दीवार और द्वार
तिगरी धाम और तिगरी मेला
बायें का कुआ
नसीरुद्दीन साहिब की मजार
दरगाह भूरे शाह

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