आगरा का सम्पूर्ण इतिहास अंगिरा, अरगलपुर, उग्रसेनपुर, अकबराबाद, अग्रवन से आगरा का इतिहास in hindi

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आगरा की गौरवशाली एवं वैभवशाली गाथा

आगरा का गौरव इतिहास: हिन्दू मुस्लिम सांप्रदायिक सदभाव, आध्यात्मिक, वैदिक, पौराणिक, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, कला, सुन्दर भवन, धार्मिक, मंदिर, मस्जिद, ऐतिहासिक दुर्ग, गौरवशाली सांस्कृतिक कला की प्राचीन धरोहर को आदि काल से अब तक अपने आप में समेटे हुए आगरा का विशेष इतिहास रहा है। आगरा के उत्पत्ति का इतिहास निम्न प्रकार से है। इतिहास में आगरा की आज तक की जानकारी।

आगरा उत्तर प्रदेश: आगरा उत्तर प्रदेश का प्रथम जनपद के रूप में मना गया है। आगरा किला मुगल साम्राज्य में बनी प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। आगरा किला के बनावट के कारण इसे यूनेस्कों द्धारा विश्व धरोहर की लिस्ट में भी शामिल किया गया था। आगरा में दुनिया के 7 अजूबा में शुमार ताजमहल से महज ढाई किलोमीटर की दूरी पर यमुना नदी के किनारे स्थित है।

अंगिरा = अरगलपुर = उग्रसेनपुर = अकबराबाद = अग्रवन = आगरा

पौराणिक आगरा: आगरा एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का ऐतिहासिक नगर है, इसमें देखने योग्य हैं कई स्थान है। आगरा का इतिहास मुख्य रूप से मुगल काल से जाना जाता है लेकिन इसका सम्बन्ध महर्षि अन्गिरा से है जो 1000 वर्ष ईसा पूर्व हुए थे। इतिहास में पहला ज़िक्र आगरा का महाभारत के समय से माना जाता है, जब इसे अग्रबाण या अग्रवन के नाम से संबोधित किया जाता था। कहते हैं कि पहले यह नगर आयॅग्रह के नाम से भी जाना जाता था।

महाभारत काल में आगरा: प्रसिद्ध महाकाव्य महाभारत में आगरा को “अग्रवाल” कहा जाता था। इससे पहले आगरा को आर्य गृह कहा जाता था जिसका अर्थ आर्यों के निवास स्थान से है। 

अंगिरा से आगरा का सफर: महाभारत के समय पूर्व आगरा को अग्रवन या अग्रबाण कहा जाता था। आगरा का संबंध ऋषि अंगिरा से भी है, जो 1000 ईसा पूर्व हुए थे। अंगिरा से आगरा हो गया। तौलमी पहला व्यक्ति था, जिसने इसे आगरा कहकर संबोधित किया।

महाकवि सूरदास का आगरा से सम्बन्ध: यह ब्रज की धरती है। सूरदास और रहीम की नगरी, मोहब्बत की नगरी भी कहा जाता है। महाकवि सूरदास को उनके गुरू यहीं पर मिले ​थे। आगरा में भक्ति भाव की कहानी बहुत पुरानी है। आगरा ​शहर में भगवान शिव का मनकामेश्वर मंदिर है जो बहुत प्राचीन भी है। यह मंदिर द्वापर युग का है। वैसे तो आगरा जिले में मंदिरों की नगरी बटेश्वर भी है।

आगरा की स्थापना: दिल्ली सल्तनत के उदय से पहले आगरा का इतिहास स्पष्ट नहीं था। जनश्रुतियों के अनुसार आगरा की स्थापना 1475 में बादल सिंह ने की थी। सिकंदर लोदी ने सन् 1504 ई. में आगरा शहर की स्थापना की। आगरा मुगल साम्राजय की मनपसन्द जगह थी। आगरा 1526 से 1658 तक मुग़ल साम्राज्य की राजधानी रहा। आज भी आगरा मुग़लकालीन इमारतों जैसे – ताज महल, लाल किला, फ़तेहपुर सीकरी आदि की वजह से एक प्रसिद्ध पर्यटन-स्थल है। ये तीनों इमारतें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल हैं। बाबर (मुग़ल साम्राज्य का जनक) ने यहाँ चौकोर (आयताकार एवं वर्गाकार) बाग़ों का निर्माण कराया।

आगरा शहर की स्थिति: आगरा शहर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के 206 किलोमीटर (128 मील) दक्षिण में स्थित है। आगरा उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। आगरा 27.18° उत्तर 78.02° पूर्व में यमुना नदी के तट पर स्थित एक नगर है। समुद्र-तल से इसकी औसत ऊँचाई क़रीब 171 मीटर (561 फ़ीट) है। आगरा के उत्तर में मथुरा, दक्षिण में धौलपुर, पूर्व में फ़िरोज़ाबाद, शिकोहाबाद, दक्षिण पूर्व में फ़तेहाबाद और पश्चिम में भरतपुर से घिरा हुआ है।

सुल्तान सिकंदर लोदी (निजाम खां): दिल्ली सल्तनत के मुस्लिम शासक सुल्तान सिकंदर लोदी ने 1504 में आगरा की स्थापना की, व 1506 ई0 में सिकंदर लोदी ने आगरा को अपनी राजधानी बनाया। 17 वीं शताब्दी में सिकंदर लोदी (1488-1517) के समय से पहले आगरा एक पुरानी बस्ती था। सुल्तान सिकंदरशाह लोदी ने अपने शासन काल में होने वाले विद्रोहों को दबाने के लिए वर्तमान आगरा के स्थान पर एक सैनिक छावनी बनाई थी, जिसके द्वारा उसे इटावा, बयाना, कोल, ग्वालियर और धौलपुर के विद्रोहियों को दबाने में सहायता मिली। ‘मखजन-ए-अफ़ग़ान’ के लेखक के अनुसार सुल्तान सिकंदरशाह ने कुछ चतुर आयुक्तों को दिल्ली, इटावा और चांदवर के आस-पास के इलाके में किसी उपर्युक्त स्थान पर सैनिक छावनी बनाने का काम सौंपा था और उन्होंने काफ़ी छानबीन के पश्चात् इस स्थान (आगरा) को चुना था। कुछ दिन बाद सिंकदरशाह भी यहाँ आकर रहने लगा। ‘तारीख़दाऊदी’ के लेखक के अनुसार सिकंदरशाह प्राय: आगरा में ही रहा करता था। सुल्तान की मृत्यु के बाद आगरा शहर अपने बेटे सुल्तान इब्राहिम लोदी को सौंप दिया गया।

भूकंप से नष्ट हुआ आगरा: रविवार 7 जुलाई 1505 ई. को आगरा में एक विशाल भूकंप आया, जिसने एक वर्ष पहले ही बसे हुए नगर के अनेक सुंदर भवनों को धराशायी कर दिया। ‘मख़जन’ के लेखक के अनुसार भूंकप इतना भयानक था कि उसके धक्के से इमारतों और पहाड़ तक गिर गए थे और प्रलय का सा दृश्य दिखाई देने लगा था।

इब्राहिम खां लोदी: इब्राहीम ने अपने भाई जलाल लोदी को 1518 में मारकर लोदी साम्राज्य का एकाधिकारी बन गया। इब्राहिम लोदी 1526 में पानीपत के पहले युद्ध में बाबर के द्वारा हारकर इसकी मृत्यु हो गयी। इस प्रकार महान मुगल शासन का एक लंबा शासन शहर में शुरू हुआ। पानीपत की पहली लड़ाई के बाद आगरा मुगल साम्राज्य के लिए एक प्रमुख शहर बन गया।

मुगलों का शासन: जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने 21 अप्रैल 1526 ई. को पानीपत की लड़ाई में इब्राहीम को हरा और मौत के घाट उतारकर भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की। मुगल के साथ शहर की सुनहरी उम्र शुरू हुई। पहले आगरा को अकबरबाद के रूप में जाना जाता था और बादशाह (सम्राट) अकबर, जहांगीर और शाहजहां के तहत मुगल साम्राज्य की 1648 तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रहा। अकबर ने इसे अपने मूल बारह उपहास (शाही शीर्ष-स्तर के प्रांतों), सीमावर्ती (पुरानी) दिल्ली, अवध (औध), इलाहाबाद, मालवा और अजमेर सुहाहों में से एक का नामित सीट बना दिया।

बाबर: जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने 21 अप्रैल 1526 ई. को पानीपत की लड़ाई में इब्राहीम लोदी (लोदी वंश) को हरा और मौत के घाट उतार दिया और भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की। इब्राहिम खां लोदी को हराने के बाद 10 मई 1526 को मुगल बादशाह बाबर आगरा पहुंचा तो गर्मी से परेशान हो गया। उसने तय किया किया कि ऐसी आरामगाह बनवाएगा जिसमें ठंडक रहे। उसने यह जगह यमुना किनारे बनवाई और नाम दिया हिश्त-बहिश्त। इसे उस समय लोग आराम बाग कहते थे। बाद में आगरा पर मराठों का शासन हुआ तो उन्होंने नाम बदलकर रामबाग कर दिया। तब से यही नाम चला आ रहा है। बाबर ने 1527 में खानवा 1528 मैं चंदेरी तथा 1529 में आगरा जीतकर अपने राज्य को सफल बना दिया 1530 ई० में इसकी मृत्यु हो गई।

फारसी उद्यान: अकबरबाद (आगरा) मुगलों के तहत भारत के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक था, इसलिए इसमें बहुत सारी इमारत गतिविधि देखी गई। मुगल राजवंश के संस्थापक बाबर ने यमुना नदी के तट पर पहला औपचारिक फारसी उद्यान रखा। बगीचे को अराम बाघ या आराम का बाग कहा जाता है।

शेरशाह सूरी (फ़रीद खाँ): आगरा में 1540 और 1556 के बीच शेरशाह सूरी ने शासन किया। शेरशाह सूरी ने पहले बाबर के लिये एक सैनिक के रूप में काम किया था जिन्होंने उन्हें पदोन्नत कर सेनापति बनाया और फिर बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया।

अकबर: आगरा की उन्नति मुग़ल बादशाह अकबर के समय में प्रारंभ हुई। बाबर के पोते अकबर द ग्रेट ने 1565 ई. में यहाँ लाल पत्थर का क़िला बनवाना शुरू किया, जो आठ वर्षों में तैयार हुआ। लाल किले के विशाल किनारे उठाए, आगरा को सीखने, कला, वाणिज्य और धर्म के लिए केंद्र बनाने के अलावा। अकबर ने 1569 ई. में फतेहपुर सिक्री नामक अकबरबाद के बाहरी इलाके में एक नया शहर भी बनाया। यह शहर पत्थर में एक मुगल सैन्य शिविर के रूप में बनाया गया था। अकबर ने अपने शासन के प्रारंभ में ही फ़तेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाया था, लेकिन 1586 ई. में अकबर पुन: अपनी राजधानी आगरा ले आया था। 

जहांगीर (मुहम्मद सलीम ): जंहागीर अकबर का पुत्र था। अकबर की मृत्यु के पश्चात आगरा में 3 नवम्बर 1605 को जंहागीर का राज्याभिषेक हुआ, और उसने मुगल साम्राज्य के शासन व्यवस्था संभाला। अकबर के बेटे जहांगीर को वनस्पतियों और जीवों का प्यार था।

शाहजहां (खुर्रम): शाहजहां जंहागीर का पुत्र तथा अकबर का पोता था 24 फरवरी 1682 को शाहजहां मुगल साम्राज्य का नया बादशाह बना। शाहजहां ने अकबरबाद को सबसे अधिक मूल्यवान स्मारक अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में 1653 में ताज महल दिया। मुगल बादशाह शाहजहां ने यमुना नदी के किनारे 25 एकड़ में फैले चांदनी बाग का निर्माण 1631 से 1635 के बीच कराया था। शाहजहां ने आगरा राजधानी को अपने शासनकाल के दौरान 1649 में शाहजानाबाद (पुरानी दिल्ली) स्थानांतरित कर दिया लेकिन उनका बेटा औरंगजेब राजधानी को अकबरबाद में वापस ले आया। उसने पिता से गद्दी छीन ली और उन्हें किले में कैद कर दिया। औरंगजेब के शासनकाल के दौरान अकबराबाद भारत की राजधानी बना रहा।

औरंगजेब: औरंगजेब भारत पर राज करने वाले छठे मुग़ल शहंशाह थे। औरंगजेब के शासनकाल के दौरान अकबरबाद भारत की राजधानी बना रहा। औरंगजेब का शासन 1658 से लेकर 1707 में उनकी मृत्यु होने तक चला। जब तक कि औरंगजेब ने 1653 में दक्कन में औरंगाबाद में स्थानांतरित नहीं कर देते। औरंगजेब की मृत्यु के साथ, मुगल शासन भी समाप्त हुआ। इसके बाद शहर में कई क्षेत्रीय राज्यों के उद्भव के बाद किया गया। मुगल काल के बाद, आगरा शहर मराठों, जाटों और ब्रिटिशों द्वारा शासित था।

महमूद गजनवी: 11वीं सदी के फ़ारसी कवि मासूद सलमान ने आगरा के किले पर गजनवी के आक्रमण का उल्लेख किया है, जब राजा जयपाल के शासन था। जयपाल के आत्मसमर्पण के बावजूद, महमूद ने किले को लूट लिया था।

मराठों का अधिपत्य: मुग़ल साम्राज्य के पतन के साथ 18वीं सदी के उत्तरार्ध में यह शहर क्रमशः जाटों, मराठों, मुग़लों और ग्वालियर के शासक के अधीन रहा और अतः 1803 में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आ गया। 1833 से 1868 तक यह आगरा प्रांत (बाद में पश्चिमोत्तर प्रांत) की राजधानी रहा।

आगरा में धर्म : आगरा धर्म का जन्मस्थान है जिसे दीन-ए इलाही कहा जाता है। जो अकबर के शासनकाल और राधास्वामी विश्वास के दौरान विकसित हुआ, जिसमें दुनिया भर में लगभग दो लाख अनुयायी हैं। आगरा के पास जैन धर्म के शौरीपुर और 1000 ईसा पूर्व हिंदू धर्म के रनुका के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं। दूसरी शताब्दी में भूगोलवेदता टॉलेमी ने इसे विश्व के मानचित्र पर आगरा के रूप में चिह्नित किया।

आगरा की प्रेसीडेंसी: 1835 में जब अंग्रेजों द्वारा आगरा की प्रेसीडेंसी की स्थापना हुई, तो शहर सरकार की सीट बन गई, और केवल दो साल बाद यह 1837-38 के आगरा अकाल का साक्षी था।

1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम के साक्ष्य: 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विद्रोह की खबर 11 मई को आगरा पहुंची थी और 30 मई को मूल पैदल सेना 44वें और 67वें रेजिमेंट की 2 कंपनियों ने विद्रोह किया और दिल्ली चले गए, जिससे अंग्रेजों को 8 जुलाई तक आदेश बहाल करने की अनुमति मिल गई। आगरा में अगली सुबह देशी भारतीय सैनिकों को 15 जून को ग्वालियर (जो आगरा के दक्षिण में स्थित है) पर विद्रोह करने के लिए मजबूर होना पड़ा। 3 जुलाई तक, अंग्रेजों को किले में वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। दो दिन बाद सुचेता में एक छोटी ब्रिटिश सेना को पराजित कर दिया गया और उसे वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया गया। 1947 में भारत की आजादी तक यहां ब्रिटिश शासन फिर से शहर में सुरक्षित कर लिया गया था।

आगरा के दर्शनीय स्थल: आगरा में समृद्ध ऐतिहासिक स्मारकों को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। आगरा को महलों की भूमि के रूप में भी जाना जाता है। दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक ताज महल आगरा उत्तर प्रदेश के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। मुगल वंश ने ताज महल, आगरा किले, फतेहपुर सीकरी और कई अन्य जैसे शानदार स्मारकों और इमारतों की स्थापना के लिए बेहद योगदान दिया। अकबर, जहांगीर और शाहजहां जैसे मुगल राजाओं के शासनकाल में, आगरा का इतिहास अपनी शानदार चरम पर पहुंच गया। यह अकबर था जिसने शहर को कला, संस्कृति, शिक्षा और वाणिज्य के आसन के रूप में विकसित किया।

आगरा ‘ताजमहल (17वीं सदी) का शहर’ के रूप में अधिक विख्यात है। यहाँ के अन्य स्मारकों में 16वीं सदी का अकबर द्वारा निर्मित क़िला है, जिसमें 17वीं सदी की सफ़ेद संगमरमर की मोती मस्जिद और जहाँगीरी महल है। आगरा में अपनी वास्तुशैली के लिए विख्यात मक़बरा और विशाल जामा मस्जिद भी है। इसके पश्चिमोत्तर में सिकंदरा में अकबर का मक़बरा है।

आगरा में देखने योग्य जगह क्या है ?

ताजमहल
आगरा किला
फतेहपुर सीकरी आगरा
जामा मस्जिद आगरा
मोती मस्जिद आगरा
एतमादुद्दौला का मकबरा
चीनी का रोजा
मेहताब बाग
स्वामी बाग और दयाल बाग
सिकंदरा (अकबर का मकबरा)
मरियम मकबरा
पालीवाल पार्क (हीविट पार्क)

खानपान : वैसे तो आगरा का पेठा बड़ा मशहूर है लेकिन कई चीजें ऐसी भी है जो आगरा के रग रग में समाई हैं। जैसे सुबह जलेबी और कचौरी, बेड़ई और छोले आदि चीजें यहां के प्रमुख खान पान हैं।

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